STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

3  

Kavita Sharrma

Abstract

सूरज का संदेश

सूरज का संदेश

1 min
217

अंधेरे को चीरकर फिर उजाले की किरण फूट पड़ी

प्रकाश ने थामकर जला ली उम्मीद की कड़ी

सूर्य चला स्वर्ण पोशाक पहन कर

किरणों के रथ पर‌‌ सज धज कर

पर्वतों के श्वेत हिम पर स्वर्णिम रश्मियां पड़ रहीं

मानो हंसकर उषा का हंसकर अभिनंदन कर रहीं

रात भर अनमोल मोती जो बिखेरे प्रकृति ने

सूर्य की किरणें उन्हें संभालकर एकत्रित कर रहीं

राजा रवि का स्वागत करने बिखेरी वृक्षों ने फूलों की झड़ी

पक्षियों के कलरव ने संगीत की मधुर तान छेड़ दी

मनुष्य को कर्मरत रहने का संदेश कुदरत दे रही

चलते रहे नित प्रति वही जिंदगी है भली।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract