STORYMIRROR

Raagwaj DIARY

Abstract

3  

Raagwaj DIARY

Abstract

सुनो, कुछ बताना !

सुनो, कुछ बताना !

1 min
382

चांद हूं मैं, तो दाग तो होंगे ही,

मगर,मेरी चमक में

कोई कमी हो तो बताना,


आसमानों को छू रहा हूं,

मगर अब डर लगता है,

 जहां सुकून से पैर रख सकूं,

ऐसी कोई जमीन हो तो बताना, 


माना वह फरिश्तों की महफिल है,

मगर मैं अकेला नहीं जाऊंगा,

अगर तुम भी वही हो तो बताना।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract