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Om Prakash Fulara

Abstract

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Om Prakash Fulara

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सुंदरता

सुंदरता

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गुड़िया सी लगती है सुंदर,

स्वर्णिम आभा छिपी है अंदर।


मोह सभी का मन है लेती,

खुशियों से जन मन भर देती।


अधरों पर मुस्कान सजी है,

सदा उमंगों से ये लदी है।


नयनन में नित प्रेम बसा है,

देख दुखी मन सदा हँसा है।


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