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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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सुंदरी

सुंदरी

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सुंदर भाल कमल नयन,

कपोल गुलाबी मनमोहक,

होंठ रसीले है पंखुड़ी से,

गर्दन उसकी है सुराही सी।


कंचुकी से झांक रही है,

उसके भरे हुए उन्माद।

नयनों को मादकता से,

सभी हो जाते देख बेहाल 


संगमरमर सा है सुंदर बदन,

कर कमलों सा खिला हुआ,

कमर की लोचकता को देख,

दिल सभी का उछल पड़ा।


देख चाल उसकी मतवाली,

नयन सभी के खुल जाते,

पैरों के बजते पायल से,

निकले धुन भी अलबेली।


देख ऐसी सुंदर नारी नवेली,

बिक जाते हैं कई हवेली,

स्वयं पर रहता नहीं नियंत्रण,

बन जाते हैं सभी पहेली।



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