STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

3  

Surendra kumar singh

Abstract

सुन रहे हैं

सुन रहे हैं

1 min
190


सुन रहे हैं

झील से चाँद की बातें

और ख़याल में है

उसका छत पर आना

सुन रहे हैं

जज्बात की बातें

और ख्याल में है

जज्बात की जमीन

अब इन बादलों से उड़ते

जज्बातों और ख्यालातों का क्या

जहाँ भी हैं

वहीं खो जाएं खुद में

किसी को इंतजार है

आप का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract