STORYMIRROR

Yashvi bali

Inspirational

4  

Yashvi bali

Inspirational

सुकून ही सुकून ….

सुकून ही सुकून ….

1 min
247


ग़र लेने की चाह नही ..

जो दिया उसे गिनने की परवाह नही ..

लेना देना नही …..यहाँ ….

तो सुकून दूर नही …..पास है मेरे 


एक इंसान ही है इस जहां में …

जिसे लेने की चाह है ….

और देने की भी होड़ है …..

शायद इसीलिए ….

वो बेसकूँ ….और परेशान है


ज़िंदगी ख़ुशगवार होती है 

ग़र हम लेने की सोच से परे 

एक सुंदर जहां में …..

पंछी जहां गाते है चहचहाते हैं 

मीठा सुर अपनी मधुर कूक से 

सजाते हैं …,,

बिना देखे ,जाने बूझे …..

कौन है जो सुन रहा है ………उनकी मीठी मधुर आवाज़…

 और अपना दिल बहलाते है 

बेफ़िक्र हैं इस बात से 

तो चैन है …,,,सुकून है 


सूरज की रोशनी ….किस ने ली किस ने नही …

अनजान है वो अरुण …इस बात से 

हवा चलती है मंद मंद …

फूल खिलते है ….. और सिमट जाते है 


फिर मैं ही क्यूँ …., यशवी 

समझ नही पायी ..,, उसकी लीला ….

देर से ही समझ आयी …

पर आज समझ के इसे …

पा गयी तेरी मेहरबानी …

सुकून ही सुकून है ….

तेरी दी हुई इस जिंदागनी में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational