सतरंगी
सतरंगी
प्रेम-रंग में रंगा हो अगर
आपका चंचल मन,
बेझिझक कह दीजिये
अपने खूबसूरत दिल की बात...!
उनके धड़कते दिल में
आपकी सच्ची मोहब्बत के लिए
थोड़ी जगह हो अगर,
तो इज़हार-ए-मोह्हबत
रफ्ता-रफ्ता हो ही जाएगी...!
और एक बात ज़रा
समझ लीजिये, दोस्त,
आपकी आवारगी ही आहिस्ता-आहिस्ता उनकी दीवानगी बन जाएगी...!!
यूँ तो मगर मिलता नहीं
राह चलते दिलबर...
मगर चलते-चलते बन जाते हैं यहाँ
अक्सर कारवाँ-ए-मंज़र...
ये रंग है आशिक़ी की, बेबसी की, दीवानगी की...
इसे तुम ज़्यादा आग दोगे, तो
धुआँ उठेगा ज़रूर, ऐ मुसाफिर!
तुम बस प्यार का इज़हार करना
ख़ामोशी से...
कि आँखों को भी खबर न हो
तुम्हारे दिल की चाहत-ओ-इनायत की...

