"स्थिति चाहे प्रतिकूल हो "।
"स्थिति चाहे प्रतिकूल हो "।
स्थिति चाहे प्रतिकूल हो, जीवन कंटक भूल।
मानव मन जज्बाती बन, करता उसको फूल।
करता उसको फूल, उम्मीद सब जगा जाता।
क्लेद मनुष्य भूलकर, पार नैया कर पाता।
कह" जय "रखना होश, कितनी विपरीत परिस्थिति।
बदलना रूख हवा, चाहे प्रतिकूल हो स्थिति।
