सर्दी की रातें
सर्दी की रातें
गमों की तरह
बड़ी लंबी होती हैं
ये सर्दी की रातें ।
काटे नहीं कटती हैं
टीस जगाती हैं
हाड़ गलाती हैं
ये सर्दी की रातें ।
जुदाई का दंश
अंदर तक हिला देता है
गुजरे दिनों का साथ
सोने नहीं देता है
प्यार की तरह
तापमान भी गिरता जाता है
दो दो रजाइयों में भी
चैन नहीं आता है
कैसे बताऐं कैसे कटती हैं
हाय , अकेले, सर्दी की रातें ।
जिनके मीत साथ हैं
उनके लिए वरदान हैं
ये सरदी की रातें ।
चिपक कर सोने का आनंद
इन्हीं रातों में तो आता है
इन रातों में तो
जोश भी युवा हो जाता है
दिल से दिल , सांस से सांस
मिला देती हैं ये सर्दी की रातें
कुदरत का उपहार है
ये सर्दी की रातें
मनमीत की बांहों में
न जाने कब गुजर जाती हैं
ये सरदी की रातें ।
कोई "निशानी" छोड़ जाती हैं
ये सरदी की रातें ।
