सर्द रातों में अगन लगी
सर्द रातों में अगन लगी
सर्द रातों में तेरी छुअन से लगी है अगन ,
आकर अपने बाहुपाश में कस लो सजन !
सर्दी की ठंडी - ठंडी ठिठुरती लंबी रातों में ,
हमने कहा लेकर हाथ उनका अपने हाथों में !
आखिर कह दी हमने अपने दिल की बात ,
कि अब हमें रहना है हमें आपके ही साथ !
अब आप चाहे कितना भी दूर जाएं मुझसे ,
पर उनकी बांहों में सोने को मेरा मन तरसे !
अबके सर्दियां रातों को सताती खूब है ,
अब आ भी जा,क्यूँ मुझसे दूर मेरा महबूब है !

