सफ़र
सफ़र
सफ़र तो किया होगा हर किसी ने,
चाहे वो हो बस, विमान या रेल से।
कुछ सफ़र होंगे लंबे,
तो कुछ छोटे भी होंगे,
कुछ आसान,
तो कुछ कठिन भी होंगे।
पर यह सफ़र वैसा नहीं,
बहुत-ही भिन्न है यह।
यह सफ़र तो वो है,
जो हर कोई तय करता है,
करना ही पड़ता है।
पहली श्वास से,
आखरी तक,
अर्थात जन्म से,
मृत्यु तक।
परंतु यह सफ़र
इतना सरल भी तो नहीं,
यहाँ तो, पड़ाव है कई।
कुछ पड़ाव है सरल,
कुछ कठिन;
पर फिर भी,
मज़े से बिताओ हर दिन,
क्योंकि इन दिनों को
वापिस लाने वाला,
नहीं है हमारे पास कोई जिन्न।
कुछ ऐसे हैं यह पड़ाव-
नादानी, परतंत्रता,
स्वतंत्रता और भाग-दौड़,
जहाँ प्रत्येक पड़ाव मज़ेदार है।
नादानी -
जब क्या करते हैं,
पता ही नहीं,
बस आवश्यकता है तो,
खिलौने, या मौज करने के साधन कही।
परतंत्रता -
जब पुस्तकें बन जाए दोस्त,
पर इनके अलावा भी कई दोस्त हो,
माता-पिता पर परतंत्र हो,
उनके संग नोक-झोक शुरु ही हो।
स्वतंत्रता -
जब पुस्तकें हो जीवन का अभिन्न अंग,
ऊँची उड़ानें भरने लग जाए, इनके संग।
जब किसी पर परतंत्र न हो,
फिर भी, संबंध बनाए रखे जो।
भाग-दौड़ -
जब अपने कार्य से हो जाए लगाव,
कुछ चिंता-भरे हो भाव,
पर फिर भी,
छोटी-छोटी चीज़ों से खुशियाँ मिले।
ऐसी अनोखी यह ज़िन्दगी है,
जो भगवान द्वारा,
उपहार स्वरूप,
प्रत्येक को प्राप्त हुई है।
इस सफ़र में,
हर पल का मज़ा लेना है,
क्योंकि यह अनोखा है,
इसलिए केवल एक बार
तय किया जा सकता है।
तो आइए, आज एहसास हुआ है,
तो हम हर उस क्षण हेतु,
उस परमात्मा के शुक्रगुज़ार हो,
हमें ऐसी अनोखी ज़िन्दगी का उपहार,
भेंट करने के लिए।
