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Raashi Shah

Inspirational


3.2  

Raashi Shah

Inspirational


ओ बिटिया

ओ बिटिया

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छोटी-सी वो तितली हमारी,

जिसे हमने दिखाई थी सही राह​,

आज दे रही है, अपनी आँखों में,

अनगिनत सपनों को पनाह​।

खोल देंगे सारे खिड़की-दरवाज़ें,

कर देंगे सबको आगाह​,

अब हमारी बेटियाँ ही,

दिखाएँगी हमें उचित राह​।

आज खड़ी है अपने पैरों पर​,

नहीं चाहिए इन्हें किसी का सहारा,

इतनी क्षमता रखती हैं अपने भीतर​,

कि बदल दें पूरी दुनिया का नज़ारा।

खोल देंगे सारे खिड़की-दरवाज़ें,

कर देंगे सबको आगाह​,

अब हमारी बेटियाँ ही,

दिखाएँगी हमें उचित राह​।


काँटों भरे रास्ते पर चलकर आईं हैं ये,

चोट लगने का नहीं है डर​,

सिर्फ़ अपने हिस्से की इज़्ज़त चाहती हैं ये,

नहीं बनना चाहती, 'स्त्री एवं पुरुष में से बेहतर कौन' ,

इस प्रतियोगिता का विनर​।

खोल देंगे सारे खिड़की-दरवाज़े,

कर देंगे सबको आगाह​,

अब हमारी बेटियाँ ही,

दिखाएँगी हमें उचित राह​।


गुड़ियों से खेलतीं हैं लड़कियाँ,

कहा जाता है, ये सर्वविधित सत्य है;

लेकिन दूसरों के लिए,

अपने सपनों से खेलतीं हैं लड़कियाँ,

इस बात से तो क​ई अनभिज्ञ हैं।

खोल देंगे सारे खिड़की-दरवाज़ें,

कर देंगे सबको आगाह​,

अब हमारी बेटियाँ ही,

दिखाएँगी हमें उचित राह​।


जिसको चलना सिखाने के लिए,

कभी हमने थामी थी उँगली,

वो आज सहारा बनकर​,

थाम रहीं हैं हमारा हाथ​,

एक बार मौका तो दो इन्हें,

फिर देखना इनके क़रामात।

खोल देंगे सारे खिड़की-दरवाज़ें,

कर देंगे सबको आगाह​,

अब हमारी बेटियाँ ही,

दिखाएँगी हमें उचित राह​,

अब हमारी बेटियाँ ही,

दिखाएँगी हमें उचित राह​।


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