Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Rasmita Dixit

Tragedy

3  

Rasmita Dixit

Tragedy

सफर

सफर

1 min
33


जिंदगी का ये सफर 

थोड़ा नीला थोड़ा पीला 

यु हीं चलती रहा 

हम चलते रहे 

सुबह होते गए

शाम आती रही 

रात का आना बाकी था 

वक्त ठहर गया है ये तो हमे 

अभी पता चला ।


पन्ने पलट गए 

हम अब भी उसी मुकाम पर 

खड़े होकर देख रहे हैं 

उन बेबस चेहरों को 

जो कभी अपने थे 

दिल के करीब थे 

कब चेहरे बदल गए 

दिल के सौ टुकड़े हुए 

ये तो हमे पता ही ना था 

कब हाथों से रिश्तों का ड़ोर 

खिसक चला ...........।


इक तुम ही तो थे 

सारे सफर का हमसफ़र 

कब और क्यों 

हाथ छुटा 

साथ टूटा 

ये बात आज भी मुझे 

सता रही है 

तड़पा रही है 

क्या खता थी मेरी 

वक़्त ने ये कैसा खेल खेला 

अब भी हम उन हसीन पलों को

सीने से लगा कर 

अकेले चल रहे हैं

अकेले तो हम पहले से थे 

इक भरम में जी रहे थे 

बस ये बात हम समझ ना सके

 यही तो जिंदगी की सच्चाई है 

जिसे जितना चाहो

उसने ही एकदिन 

तुम्हे मार डाला ........।


Rate this content
Log in