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Madhu Vashishta

Action Classics Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Classics Inspirational

सोशल मीडिया

सोशल मीडिया

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कितना प्यारा था बचपन हमारा

गर्मियों की छुट्टियों में तय था कहीं ना कहीं जाना हमारा।

दादी, नानी, मौसी, ताऊ सब गर्मियों की छुट्टियों का इंतजार किया करते थे।

नई नई जगहों पर हम मिलजुल कर घूमा करते थे।

छुट्टियों के खत्म होते ही हम अगली छुट्टियों का इंतजार किया करते थे।


छुक छुक रेल हो, पानी का हो जहाज या कि हो हवाई जहाज।

सब जगह घूमने थे हम।

होटल की दरकार नहीं थी किसी ना किसी रिश्तेदार के घर ही रूकते थे हम।

जगह की कमी कभी होती नहीं थी।

दिलों में सबके बहुत जगह थी।

हम बच्चे सब मिलकर खुश होते।

नानी दादी के घर तो पूरे ही मजे होते।


आज यह कैसा समय आ गया।

व्यस्त प्रत्येक रिश्तेदार हैं,

जिसके घर भी जाना चाहो पता चलता है वही बीमार है।

गोपनीयता सबको चाहिए

बिना बताए किसी के घर नहीं जाना चाहिए।

विदेश यात्राओं को भी जा रहे हैं लेकिन,

अकेले घूम रहे हैं साथ नहीं परिवार है।


बचपन तो तब ही अच्छा था

तब हर बच्चा केवल बच्चा ही था।

बच्चों का बचपन आज खो सा गया है

पूरा जीवन सोशल मीडिया की ही भेंट हो गया है।

अब जहां जाना है सब को बताना है।

सुंदर यादें मन में है नहीं लेकिन सोशल मीडिया में सबको दिखाना है।


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