संतुलित जीवन
संतुलित जीवन
सुख दुःख तो आने जाने हैं
स्वयं आते हैं स्वयं चले जाते हैं,
तुम न उन्हें बुलाते हो न भेजते हो
न उनके आने जाने से फ़र्क़ पड़ता है।
सम रहो हर्ष विषाद से दूर रहो
प्रसन्न रहो, डूबो नहीं, तैरो,
यही एक तरीक़ा है प्रफुल्ल रहने का
जीवन को मुस्कानों से भरने का।
निर्लिप्त होकर जीने का
सुख दुःख से ऊपर उठने का,
ख़ुशी हो या ग़म स्थिर रहने का
अपने में संतुलन बनाये रखने का।
