समंदर के किनारे लहेरे चल रही।
समंदर के किनारे लहेरे चल रही।
समंदर के किनारे लहरे चल रही।
कुछ बीच में रुक गई।
कुछ किनारे तक गई।
कुछ किनारे रेत में मिलकर।
फिर से समंदर बन गई।
एक शाम रात को ढलते हुए देखा।
तिमीरी अंधकार को उतरते हुए देखा।
आहिस्ता आहिस्ता रात उतर चुकी।
आधी दुनिया को थमते हुए देखा।
आधी दुनिया भूखी सो गई।
आधी दुनिया मदिरा में डूब गई।
रात शर्मसार होकर चल पड़ी।
फिर सुबह होकर उसमें मिल गई!
यही तो रफ्तार जिन्दगी की।
हर रोज की हर दिन की यहाँ।
