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Narendra K Trivedi

Romance

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Narendra K Trivedi

Romance

प्रेम से भीगते रहे बरसात में

प्रेम से भीगते रहे बरसात में

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प्रेम से भीगते रहे बरसात में 

दो दिल धड़कते रहे बरसात में


तन _बदन में उर्मीयां तो प्रस्फुटित रही

तरसते रहे साथ को बरसात में


उड़ती बालों की लट वायु_लहरियों से 

जल_बिंदू टपकते रहे बरसात में 


बारिश में बिजली चमकती तो साथ में 

डर से व्याकुल हो रहे बरसात में 


आंख से बातें हुई पलकें झूकी 

बाहों में जकड़ रहे बरसात में 


और हो गए ये रास्ते पानी_पानी

भीतर में उतर रहें बरसात में।



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