STORYMIRROR

Rominder Thethi

Tragedy

4  

Rominder Thethi

Tragedy

समझोते

समझोते

1 min
24

बड़े समझोते किए ज़िन्दगी तेरे लिए 

आज खुल कर जीने को मन करता है 

जिम्मेदारियों के पिंजरे में कैद हूं मुद्दत से 

आज खुले आसमां में उड़ने को मन करता है 

मैंने दिल की सुनी ना कहीं किसी से कभी 

आज दीवारों से दिल की बात कहने को मन करता है 

ग़म दिल में छुपा यूं ही मुस्कराया नहीं जाता अब

कहीं तन्हा बैठ आंखों में अश्क भरने को मन करता है 

मेरी रुसवा मुहब्बत का घर है जहां 

आज फिर उस गली में गुजरने को मन करता है 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy