समाज सेवा, सर्वोत्तम भक्ति।
समाज सेवा, सर्वोत्तम भक्ति।
आज इंसान,
मुसीबतों से घिरा,
कहीं लड़ाई और झगड़ा,
कहीं प्रकृतिक आपदा,
कहीं महामारी,
साधन युक्त के लिए सुगमता,
परंतु असहाय के लिए,
कठिन समय।
ताकतवर असहाय को डराता,
व्यवस्था भी,
असहाय का करती शोषण,
इन सबसे बचने का,
एक ही ढंग,
करो असहाय, साधन विहीन की मदद।
साधन युक्त को चाहिए,
अपनी आय का,
कुछ हिस्सा,
लगाए असहाय और साधन विहीन की सेवा में,
यही सच्ची ईश्वर भक्ति,
और सच्ची समाज सेवा।
जब पोंछोगे इनके आंसू,
करोगे मदद,
बांटोगे इनके दुःख दर्द,
ये सब देंगे,
आपको दुआएं,
यही तो है,
असली धन।
