STORYMIRROR

प्रवीन शर्मा

Tragedy Others

4  

प्रवीन शर्मा

Tragedy Others

स्लो जनरेशन का एक अज्ञानी

स्लो जनरेशन का एक अज्ञानी

1 min
251

इन घड़ी वालों के पास वक़्त कहाँ है

इनकी बातों में वो बात अब कहाँ है

जिंदगी आसान करने के फंडे ढूंढते ढूंढते

छप्पर तो अभी भी है, उठवाने वाले हाथ कहाँ है।


इस अंधी दौड़ में, पर्दे में है सबकी आंखें

किसी छप्पर फटने के इंतजार में सबकी बाहें

दूरी कम करने में कमर कस के लगे है मगर 

पास रहने वालों के भी पास आते कहाँ है।


जन्मदिन याद रखने को 'कलैंडर' ढूंढते है

लोरी अब बच्चे 'मोबाइल' पर सुनते है

जमाना बदल गया साहब फिक्र मत करिए

दोस्ती के लिए 'राइट स्वाइप' है 'राइट चॉइस' कहाँ है।


पिछली 'जनरेशन' 'स्लो' थी,अब 'लवली ग्लो' है

बताया था याद नहीं रहा, प्यार कितने रुपये किलो है

'फिगर कॉन्शियस' माँएं अब दूध डब्बे का लाती है

बच्चों की गर्लफ्रेंड रूठी है 'कॉकटेल' में, बचपन कहाँ है।


खैर अच्छा हुआ मैं बूढ़ा हो लिया जल्दी

अनसुना करो, इन बातों में अब कोई ज्ञान कहाँ है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy