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V. Aaradhyaa

Romance

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V. Aaradhyaa

Romance

सखी री!निगोड़ा बसंत सताता है

सखी री!निगोड़ा बसंत सताता है

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बसंत ऋतु के आते ही ,

     मेरा मन चंचल हो जाता है !


अपने प्रिय के आलिंगन को ,

     याद कर तन विकल हो जाता है!


बौराई आम की डाली की तरह ,

     मेरा अंतस भी झूम झूम जाता है !


 प्रेम क्षुधा बढ़ती जाती है ,

    उनके दरस को मन बड़ा आकुलता है!


सच कहती हूँ सखी री ,

    ये ऋतुराज बसंत बहुत सताता है !



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