सिया संग राम पधारे हैं
सिया संग राम पधारे हैं
चौदह वर्ष काट के आ रहे वनवास, राम सिया की जोड़ी तो देखो।
घर आंगन में बरस रहे हैं फूल,जरा लोगों की हलचल तो देखो।।
खुशी से हो रहा हर मन रौशन, प्रेम की ऐसी बरसात तो देखो।
दीवाली मन रही घर-घर, दीयों का जरा उजाला तो देखो।।
गलियां हो रही रौशन उनके स्वागत में, जरा लोगों की अभिलाषा तो देखो।
लगी है फूलों की लड़ियां हर एक दरवाजा, जरा उनकी
शौहरत तो देखो।।
कतारों में सजे है दीप, जरा नजर उठा कर तो देखो।
सिया और राम पधारे हैं संग में जरा लक्ष्मण को तो देखो।।
जगमग हो रही है अयोध्या जरा नज़रों को उठा कर देखो।
खड़ी तीनों माताएं जरा उनके चेहरे की रौनक तो देखो।।
हृदय हो रहा व्याकुल जरा उनकी आंखों के नमी तो देखो।
खड़ी है बाहें पसारे वो कब से पुत्र के इंतजार में देखो।।
ना रुक रहे आंसू भारत और शत्रुघ्न के जरा उनकी तरफ भी देखो।
भाई के इंतजार में हृदय की जरा व्याकुलता तो देखो।।
खड़े हैं आंखें बिछाए वो जरा गले लगाने की उत्सुकता तो देखो।
दीवाली मन रही हृदय में प्यार की जरा आज बौछार तो देखो।।
दुल्हन सी सजाई अयोध्या नगरी जरा नगर वासियों की लगन तो देखो।
राम ही राम पुकारे हैं उनकी भक्ति जरा दिल खोल कर देखो।।
हर जुबां पे राम ही राम है उनके प्रति जरा कोई प्रेम का सागर तो देखो।
झूम कर गा रहे सभी मंगल गीत जरा रागिनी का राज तो देखो।।
