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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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सिंदूर

सिंदूर

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किसी औरत की मांग का सिंदूर

उसकी पति के सांसो का है नूर


जब तक वो लगाती रहेगी सिंदूर

यमराज से छीन लायेगी कोहिनूर


पहले की औरते लगाती थी सिंदूर

सौभाग्यवती का आशीर्वाद पाती थी


अब भी जो करती ये कार्य बदस्तूर

पति की उम्र का बढ़ाती है,वो नूर


फ़लक के सितारे सा वो चमकता है,

ये अकाल मृत्यु से कर देता है, उसे दूर


किसी औरत की मांग का सिंदूर

उसकी पति की सांसो का है नूर


प्रभु ने क्या ख़ूब दिया है,

ये अनमोल रंगीन अमचूर,


जो स्त्री लगाती है, प्रतिदिन सिंदूर

उसका पति नही होता कभी दूर


औरतों को सदा लगाना चाहिये सिंदूर,

ख़ुदा करता रहे सदा उसकी रक्षा,


जिस शख्श को माना उसने कोहिनूर

किसी औरत की मांग का सिंदूर

उसकी पति की सांसों का है नूर।


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