STORYMIRROR

Rajiv R. Srivastava

Inspirational

4  

Rajiv R. Srivastava

Inspirational

श्रीराम होने का अर्थ...!

श्रीराम होने का अर्थ...!

1 min
355

परहित में त्यागे जो निज हित और मीत।

सीखो तुम श्रीराम से, रे मन मानुष रीत॥

संतों के संताप सुन, जो हो उठे अधीर,

युवा काल में ही हरे, जा के संतन पीर;


असुरों से अदावत और पत्थरों से प्रीत।

सीखो तुम श्रीराम से, रे मन मानुष रीत॥

पितृ वचन निभाने को औ’ बचाने लाज,

पल में वो परित्यागे, रत्नजड़ित वो राज;


छन में वन वरण किए, ना हुए भयभीत।

सीखो तुम श्रीराम से, रे मन मानुष रीत॥

कितने कष्ट सहे और, सहे सिया वियोग,

केवट शबरी से नेह पशु पंछी से सहयोग;


धैर्य धर्म विवेक बल जीते रासि अजीत।

सीखो तुम श्रीराम से, रे मन मानुष रीत॥


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational