सुरशक्ति गुप्ता
Classics
मानव शरीर की सबसे बड़ी भूख
उसके अंदर बसे "अहं"की होती है
और इसकी मनपसंद खुराक है-रिश्ते नाते
जिन्हे यह शनैः शनैः निगलता रहता है,
और व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है।।।
आत्मीय कंपन
प्यार
प्रेम संदेश
नवरात्रै
रंगोत्सव
श्रीराम
विश्व हिंदी द...
एकान्तता
सर्वश्रेष्ठ उ...
दुनिया की इस भागदौड मैं चलो कभी अपने लिये भी जीते है। दुनिया की इस भागदौड मैं चलो कभी अपने लिये भी जीते है।
सहकर्म का उस पर प्रभाव है तथैव उसका स्वप्न करूणानिधार है। सहकर्म का उस पर प्रभाव है तथैव उसका स्वप्न करूणानिधार है।
तकरीरें बाकी थी तमाम, सर हिलाना, कबूल- ए- गुनाह हो गया। तकरीरें बाकी थी तमाम, सर हिलाना, कबूल- ए- गुनाह हो गया।
दिल डरता है ख़ामोशी से कि अब सुकून है इसी ख़ामोशी में। दिल डरता है ख़ामोशी से कि अब सुकून है इसी ख़ामोशी में।
मेरी साँसें, अब हर एक पल तन्हाइयों में रहती है। मेरी साँसें, अब हर एक पल तन्हाइयों में रहती है।
छोड़कर हाथ सभी का चिकित्सा पर निर्भर करता है छोड़कर हाथ सभी का चिकित्सा पर निर्भर करता है
तो कहीं सच में तस्वीर न बन जाऊँ और दिखूँ मैं कोई दीवार पर टंगा हुआ। तो कहीं सच में तस्वीर न बन जाऊँ और दिखूँ मैं कोई दीवार पर टंगा हुआ।
कुछ तो इत्मीनान रखना दिल की धड़कन को सदा जवान रखना। कुछ तो इत्मीनान रखना दिल की धड़कन को सदा जवान रखना।
वक्त की बहती धारा में, अब ठहरना कौन है चाहता ? वक्त की बहती धारा में, अब ठहरना कौन है चाहता ?
एक दीवार बनाने के लिए ईंट आखिर कैसी भी हो हर एक ईंट महत्वपूर्ण है। एक दीवार बनाने के लिए ईंट आखिर कैसी भी हो हर एक ईंट महत्वपूर्ण है।
अपने घर के अंदर देख रहे हैं बारिश लेके आंखों में कई सपने। अपने घर के अंदर देख रहे हैं बारिश लेके आंखों में कई सपने।
घाव छीलने की इजाज़त चाहता है। घाव छीलने की इजाज़त चाहता है।
अलौकिक स्नेह की सुगन्ध, चारों और फैलाओ। अलौकिक स्नेह की सुगन्ध, चारों और फैलाओ।
एक जुड़ाव मित्र सा होता है, जब साथ तुम्हारा होता है। एक जुड़ाव मित्र सा होता है, जब साथ तुम्हारा होता है।
साथ में लेकर है सची को और जयंत उनका बेटा सुंदर। साथ में लेकर है सची को और जयंत उनका बेटा सुंदर।
प्रभु को ह्रदय में धारण कर योगाग्नि से शरीर जलाया। प्रभु को ह्रदय में धारण कर योगाग्नि से शरीर जलाया।
पागल है वो लोग जो गंदगी फैलाते हैं कोरोना को ख़त्म उनको ही करना है। पागल है वो लोग जो गंदगी फैलाते हैं कोरोना को ख़त्म उनको ही करना है।
चलते चलते देखा वन सुंदर पहुंचे वाल्मीकि आश्रम मुनि उन को थे लेने आ गए! चलते चलते देखा वन सुंदर पहुंचे वाल्मीकि आश्रम मुनि उन को थे लेने आ गए!
चित्रकूट वन में रहते हुए विहार करें सीता और राम लक्ष्मण उनकी सेवा में व्यस्त हैं। चित्रकूट वन में रहते हुए विहार करें सीता और राम लक्ष्मण उनकी सेवा में व्यस...
जब अपने स्वार्थ को सेवा भाव पर ला पाता है तब शिष्य गुरु-रूप हो जाता है। जब अपने स्वार्थ को सेवा भाव पर ला पाता है तब शिष्य गुरु-रूप हो जाता है।