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Phool Singh

Classics Inspirational

4  

Phool Singh

Classics Inspirational

श्री राम

श्री राम

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समझ पाना श्री राम चरित्र को, इतना भी आसान नहीं

वन-वन भटके भ्रात, संगिनी संग, ये सरल पुरुषों का काम नहीं।


पितृ आज्ञा अटल वचन है, जो निभाए पुत्र, वही

रिश्ते-नाते धूमिल पड़ते, देखी, कठिन प्रतिज्ञा ऐसी नहीं।


न अपराध, न कोई दोष था, माँ के आदेश भी माने सभी

ममता उनकी सिरोधार्य, दोष दिया न उनकों कभी।


कंदमूल खाना, बस्ती, गाँव-शहर न जाना, घर-परिवार भी साथ नहीं

पशु-पक्षी भयंकर जंगल रहते, दैत्य, असुर, दानव विकराल सभी।


रोते, बिलकते संगिनी खातिर, पूछते, जीव-जन्तु और पेड़ सभी

अथाह प्रेम में अश्रु बहते, प्रेमी उनके जैसा नहीं।


सुग्रीव के जैसा मित्र मिला पर, स्वार्थ छिपा था उसमें कहीं

धर्म-अधर्म का पेंच फसेगा, सौदा कोई ये आसान नहीं।


पग-पग चुनौतियाँ राह बीछी पर, रीछ, लंगूर, वानरों का साथ सभी

मर्यादा विकृत हो न जाए, दिया शरणागतों को मान सभी।


हर संभव मौका दिया सभी को, मित्र-शत्रु चाहे जीव कोई

धनुष, कंधे पर रहे सुशोभित, अधरों से मुस्कान वही।


क्रोधाग्नि भड़कने दी न, बने दानव, असुरों के संहारक भी

महान पुरुष तो हुए बहुत से, पर, मर्यादित उनके जैसा नहीं।


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