STORYMIRROR

Ruchika Rai

Abstract

3  

Ruchika Rai

Abstract

शिव स्तुति

शिव स्तुति

1 min
263

देवों के देव महादेव तुम,

त्रिनेत्र हो त्रिकालदर्शी हो,

जटा में गंगा समेटे हुए सदा,

भक्तों की तुम शक्ति हो।


विषपान करते तुम नीलकंठ हो,

अव्यक्त तुम, तुम ही व्यक्त हो।

सर्प बिच्छू कीट सभी सेवक है,

कैलाश पर्वत वासी तुम गौरीशंकर हो।


शिव रूप तुम ही तुम ही शिवा हो,

मृग छाल तन पर भभूत लपेटे हो,

नंदी की सवारी तुम्हारी है सदा से,

तुम पशुपतिनाथ तुम दीर्घेश्वर हो।


सत्य भी तुम ही तुम ही सुंदर हो,

जगत के पालनार्थ तुम मार्गदर्शक हो,

तुम ही पार्वती पति भोले अडभंगी हो,

भांग बिल्वपत्र धतूरा के तुम प्रशंसक हो।


हे प्रभु महादेव, तुम ही सर्वेश्वर हो,

तुमसे ही सारी सृष्टि तुम नियंत्रक हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract