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Tanha Shayar Hu Yash

Tragedy

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Tanha Shayar Hu Yash

Tragedy

शहरो के शहर सुने

शहरो के शहर सुने

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शहरो के शहर सुने पड़े है और

हम निकल पड़े है ख्यालों में,

की हक़ीक़त में ज़मी पर अब 

एक दूसरे से हम मिलते नहीं। 

 

नज़रे नीले अम्बर सी सुनी है और 

हम निकल चले प्यासों को पानी देने,

की कुछ लोग खुद भी सम्भले

वो एक दूसरे को देख सम्भलते नहीं।

 

शहरो के शहर सुने पड़े है, और

हम निकल पड़े है ख्यालों में,

 

अब ये मौसम ना जाने कोन करवट ले

थम जाये ना साँसे ये जो अब सलवट ले

की तमाम उम्र गुज़री है इत्मीनान से

अब आखिरी पन्ने मेरी शाम से गुज़रते नहीं। 

 

शहरोंं के शहर सुने पड़े है और

हम निकल पड़े है ख्यालों में।


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