STORYMIRROR

Manjibhai Bavaliya,મનરવ

Abstract Children Stories Comedy

3  

Manjibhai Bavaliya,મનરવ

Abstract Children Stories Comedy

शब्दासमन

शब्दासमन

1 min
193

लगाव में रत रहते,

कभी ऐसा भी होता है

लेखन चलते आगे,

लेखक पीड़ा होता है।

कभी रह जाते भाग्याधिन,

कुछ राहों में बिखरता होता है।

जमाने भी बहते गम भर,

सांचों भी खता होता है।

हर पल का ए गुजारा,

अपना जीवन का शेष होता है।

नज़र के अंदाजे नहीं,

क्षितिज का सार दिखता होता है।

शब्द सरते ही रहते,

बहाते मेले पार यार होता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract