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Manjibhai Bavaliya,મનરવ

Abstract Classics Others

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Manjibhai Bavaliya,મનરવ

Abstract Classics Others

हिन्दी की हिन्दी

हिन्दी की हिन्दी

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हर भासे निराली, हिन्दी हिन्द की शान है।
हर जन मन जूडे,भातिगल में भात है।
व्यक्त विचारों,सब जन मन समझता ए।
अपनाती भासे भारतीय,जन मन गूंज गाते हैं।

विकास करती बहे भारत की भाषा है।
संस्कृति की शान, सर्जको का मान है।
साहित्य समृद्धि लोक जागृति नागरिकों में।
सरल भावे बहती रस जर बानी बात है।

एकता में अमिरात,हिन्दी हिन्द की आश है।
आदान प्रदाने, समाज धडत की पाश है।
विद्या अध्ययन ए निपूता जन का ज्ञान है।
विशाल भारत बहुविध भावे भरी भान है।

मनजीभाई कालुभाई मनरव मु बोरला ता तलाजा जी भावनगर गुजरात 


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