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Sudesh Gautam

Tragedy

4  

Sudesh Gautam

Tragedy

शैलजा

शैलजा

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" मन" स्वस्थ हुआ।

आपके "सुस्वस्थ" होने पर।।


मन अस्त-व्यस्त हुआ बहुत।

 "शैलजा" जी के अमर होने पर ।।1।।


टूट जाता है मन "प्रिय" के खोने पर ।

जीव जाता नहीं कहीँ "जी" में होने पर ।।


"रूह" का रूह से "ख़ूब" गहरा है नाता।  

रूह "रूह" में ही है "रूह" में होने पर।।2।। 


जीवन रात-प्रभात है खिज़ां- बरसात है।

आज है, कल है , और है कल -आज ।।


कौन आया, गया कौन, सब है ये रिवाज़ हैं।

रूह नित थी, है,होगी नित ये हिसाब हैं।।3।।


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