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Sneha Srivastava

Inspirational Others

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Sneha Srivastava

Inspirational Others

शाश्वत प्रेम

शाश्वत प्रेम

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मैंने तुमने और हम सब ने,

बहुत निकट से देखा है,

 शाश्वत प्रेम।


सूरज जब बिना किसी भेदभाव के,

 अपनी रोशनी और ऊर्जा,

 इस संसार को देता है।


मैंने तुमने और हम सब ने,

बहुत निकट से देखा है,

 शाश्वत प्रेम।


नदियों का यह पावन जल,

जब संसार को बिना शर्त,

जीवन अमृत देता है।


मैंने तुमने और हम सब ने,

बहुत निकट से देखा है,

शाश्वत प्रेम।


पहाड़ों ने प्रहरी बन,

जैसे अपना फर्ज हो निभाया,

मैंने तुमने और हम सब ने,

बहुत निकट से देखा है,

शाश्वत प्रेम।


प्रकृति ने संसार पर,

 प्रेम सदियों से है लुटाया,

फिर भी इंसान समझ ना पाया,

शाश्वत प्रेम।


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