शांति दूत
शांति दूत
हे रावण मैं अंगद हूँ
मैं शांति दूत बन आया हूँ
अपने स्वामी श्री राम का
एक संदेशा लाया हूँ
लौटा दो सीता माता को
अब भी तुम सम्मान सहित
लौट चलेंगे अभी आज हम
अपने वानर सैन्य सहित
युद्ध कदापि नहीं चाहते
यह बतलाने आया हूँ
अपने स्वामी श्री राम का
यह संदेशा लाया हूँ।।
शरण में उनकी आ जाओ तुम
क्षमा तुझे वह कर देंगे
आज रात का समय शेष है
सुबह चढ़ाई कर देंगे
बैर न कर मेरे रघुवर से
लंका को बचाने आया हूँ
अपने स्वामी श्री राम का
यह संदेशा लाया हूँ।
