शादी के वचन
शादी के वचन
लासानी उसे हमने, ऐ यार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
रिश्ता विवाह का ये, अनमोल धरोहर है
विश्वास का अंबर है, ये प्रेम का सागर है।
लेती है वधू वर से, ये वादा साथ रक्खें
हर धर्म कर्म में वो, उस के ही बराबर है।
हर काम बिना वधू के, बेकार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों,का हार बनाया है।
माता पिता वधू के, जी जान से प्यारे हों
जो है जनक वधू के, वर ने न बिसारे हों।
परिवार की मर्यादा, का पास रखें हरदम
संबंध बने ऐसे, जीवन के सहारे हों।
हमने मोहब्बतों का, संसार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
हर वय में साथ रक्खें, कोई भी अवस्था हो
सम्मान से जीने की, हर एक व्यवस्था हो।
ना दूर कभी होवे, वर साथ नहीं छोड़े
इस तरह से बढ़े के, आसान सा रास्ता हो।
स्थायी ये जन्मों का, आधार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
परिवार के पोषण का, दायित्व निभाना है
निर्भर रहे अब तक, अब भार उठाना है।
ले ले अगर वो जिम्मे, अपनी वधू का बोझा
तब ही वधु को वर के, वामांग में आना है।
इक नींव नई डाली, परिवार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
हर तरह कमाई पर, अधिकार बराबर हो
हों सहमति से खर्चे, तब लोगों सुखी घर हो।
टकराव न कोई हो, मिलजुल के रहें दोनों
वाणी से शहर टपके, नीचे न कभी सर हो।
जीवन में सफलता का, ये द्वार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
अपमान के तीरों से, घायल न करेगा वो
जो काम भी करेगा, इज्जत से डरेगा वो।
सट्टे से खुद बचेगा, जुआ नहीं खेलेगा
मदिरा नहीं पीएगा, हर दर्द हरेगा वो।
नायाब वर का हमने, किरदार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
हर नार पराई जो, माँ के समान होगी
वर के लिए वधु ही, सारा जहान होगी।
अनबन अगर हुई तो, हल प्यार से निकालें
"अनंत" अपनी सोचें, गम का निदान होगी।
ले दूसरे भी शिक्षा, वो सार बनाया है
शादी को वचन पुष्पों, का हार बनाया है।
