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Toofan Patel

Tragedy

4  

Toofan Patel

Tragedy

सफ़र

सफ़र

1 min
243


एक अनजान से सख्स के शहर तक गए।

हम खुद अपनी बर्बादी की सफर तक गए।।


वो मुस्कराये और यूं लगा की ये मोहब्बत है।

हमे कहा पता था कि हम ख़ंजर तक गए।।


सुना था कत्ल वो आंखों से किया करते है।

हम देखने नयन का कहर नजर तक गए।।


प्यास तो हमे महज पानी की ही लगी थी।

अरे, जानबूझकर हम खुद जहर तक गए।।


देखने हम उनकी सिर्फ एक ज़लक के लिए।

सुनो, हम अपने ही जनाजे की खबर तक गए।।


साहब, वो बेवफ़ा हो के भी ख़ुदा बन गए।

और हम, हम बेगुनाह थे सो कब्र तक गए।।


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