STORYMIRROR

Sarbani Daripa

Abstract

3  

Sarbani Daripa

Abstract

सच

सच

1 min
274

'सच' तू इतनी चुभती क्यों है ?

'झूठ' तो सबको लुभाती यूं है।


क्यों नहीं बन सकती मायावी ?

रंग बदलती पल पल, भांति भांति।


सफेद रंग ओढ़े आ जाती हो

लोगों को आइना दिखा जाती हो।


तुम्हें सहना,सुनना और कहना 

बहुत कठिन है 'सच'!


यहां तो झूठ का बोलबाला है बस 

सुनों

यह कलियुग है 'सच'!

यह तो कलियुग है सच !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract