STORYMIRROR

Sarbani Daripa

Abstract

2  

Sarbani Daripa

Abstract

माया

माया

1 min
316

उसने कहा- "सब माया है"

मैने पूछा-  "कौन बच पाया है"

उसने कहा- मुक्तता में सिद्धता है,

बाकी तो बस व्यर्थता है।


मैंंने पूछा- माया बिना संसार क्या ?   

रिश्ते क्या ? समाज क्या ?

माया बिना तो सब अधूरा है !

बोलो कौन बच पाया है ?


उसने कहा- यही तो मनुष्य की परीक्षा है

 इसी में सारी सार्थकता है ।

मैंंने पूछा- माया भी तो उसी मायाकार की रचना है ?

 फिर क्यों यह विडम्बना है ?


मुस्कुराये योगी और बोले-    

माया नहीं, माया नहीं,    

उसके 'जाल' पर निशाना है

'प्राणी'


बस इसमें फँसना मना है

बस इसमें फँसना मना है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract