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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Tragedy Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Tragedy Inspirational

सबसे अच्छा श्राद्ध

सबसे अच्छा श्राद्ध

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करना है, अगर तुझे सबसे ही अच्छा श्राद्ध

जीते जी, अपने मात-पिता की सेवा कर तात

जीते जी तो कभी ढंग से नही की तूने बात

मरने के बाद, दिखावे के मत दिखा तू दांत


दरिया जल से कभी नही बुझती है, प्यास

दिखावे के बजाय, जीते जी सेवा कर तात

व्यर्थ है, सब ही छपन्न भोग, मृत्यु के बाद

जीते जी दे, मात-पिता को तू सब सौगात


याद कर, अपने बचपन की तू हर वो बात

कैसे तेरी खुशी हेतु एक करते वो दिन-रात

याद कर अपना जरा तू, अपना वो भूतकाल

कैसे माता-पिता रखते थे, तेरा बहुत खयाल


यूं ही नही खिल जाता है, कोई उपवन-बाग़

सर्दी, गर्मी, वर्षा तीनों सहते वृक्ष एक साथ

तब जाकर सुवासित, सुंदर होता है, कोई बाग

मां-बाप ही है, जिन्होंने खिलाया जीवन-बाग़


उनके बिना हंसना तो दूर, जीना न था मुंहाल

सोच माता-पिता ने कैसे रखा था, तेरा ख्याल

जिसके सिर पर होता है, माता-पिता का हाथ

वो इस दुनिया मे कब होता है, साखी अनाथ


जीते जी हर इच्छा पूरी कर मात-पिता, तात

ये खुश है, तो समझ ले ईश्वर भी खुश है, तात

जिसने मात-पिता को माना, अपना भगवान

उससे तो, परमात्मा भी करना चाहता है, बात


यकीं न हो देख लो, भक्त पुंडरीक को ही, आज

जिसने प्रभु को, कहा, खड़े हुए, एक ईंट पर तात

माता-पिता तो है, तेरे जीवित नारायण भगवान

मरने के बाद से ज्यादा, तू जीते जी रख, ख्याल


करना है, अगर तुझे सबसे ही अच्छा श्राद्ध

माता-पिता को सहलाने दे तेरे, प्रेम से गाल

दुनिया मे उससे बड़ा नही होता, कोई धनवान

जिसके सिर पर होता, अपने माता-पिता हाथ


जीते जी इनकी, कद्र करना सीख ले, तू तात

सिर्फ मात-पिता है, रिश्तों की इकलौती डाल

बाकी कई रिश्ते मिल सकते, तुझे अगले साल

जीते जी इनकी, कद्र करना सीख ले, तू तात


सिर्फ ये सच्चे है, बाकी सब है, चाइनीज माल।


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