सबको मनसब मनसबी चाहिये
सबको मनसब मनसबी चाहिये
कुछ लोग शब्दों की हकीकत पर खीजते हैं,
जबकि शब्द कोई मनकल्पित नहीं होते हैं,
सबको मनसब मनसबी चाहिये,
देश-धर्म-विकास किसे चाहिये,
गठबंधन में मन:पूत कौन सपूत है,
हां मनप्रसूत कहो मनसूख है,
हमारी सत्यता पर क्यों तुम्हारा मनस्तोष नहीं होता,
क्योंकि उनकी मिथ्या पर आपका मनस्ताप नहीं होता।
