STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

3  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Inspirational

सबको मनसब मनसबी चाहिये

सबको मनसब मनसबी चाहिये

1 min
254

कुछ लोग शब्दों की हकीकत पर खीजते हैं,

जबकि शब्द कोई मनकल्पित नहीं होते हैं,


सबको मनसब मनसबी चाहिये,

देश-धर्म-विकास किसे चाहिये,


गठबंधन में मन:पूत कौन सपूत है,

हां मनप्रसूत कहो मनसूख है,


हमारी सत्यता पर क्यों तुम्हारा मनस्तोष नहीं होता,

क्योंकि उनकी मिथ्या पर आपका मनस्ताप नहीं होता।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational