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Prem Bajaj

Inspirational

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Prem Bajaj

Inspirational

सैनिक

सैनिक

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सेना का जवान

करोड़ों भारतीयों का अभिमान है वो, मेरे देश की आन-बान-शान है वो,

दुश्मन कांपे थर-थर जिससे, करे जो देश पे जान कुर्बान, वैसे रहता वो,

सदा दयावान, ऐसा सैनिक जवान है वो।


जननी से रहता दूर है, भारत मां की गोद का सुरूर है,

जिसका पल-पल करती मां इंतजार है, उसके लिए तो पूरा देश ही परिवार है।


नहीं रखता सैनिक चाह रंगीन बहारों की,

कांटों के पथ का करता वरण है,

तोपों के मुंह के आगे अपनी छाती अकड़ाता,

 फांसी के फंदे को भी खुशी से चूमता,

छाती पर गोलियां खाता,

मौत की छाया में जीवन रास रचाता मेरी सेना का वीर है।


शत्रु सीमा लांघ ना पाए, खड़ा डट कर सीमा पर वीर है, 

ग़र किसी की आंख उठी देश की ओर, 

धूल चटाता उसे सेना का वीर है।


सेना की गाथा मैं क्या सुनाऊं, सारा भारत गाता इनके गान, 

देखकर जिसको दुश्मन का सीना भी जाए कांप।


धन्य है उस मां की कोख जिसका सपूत सेना में जाता है, 

ध्वज जीत का फहराता है,

देश‌ रक्षा का प्रण पूरा करने को शीश भी अपना कटवाता है।


कैसे ब्यां करूं मैं उस सेना के जवान की व्यथा, 

जिसकी मां का चश्मा टूटा है, नहीं पता उसे या बापु की दवाई खत्म, 

बच्चों की फीस नहीं भरी, हो बीवी की आंखें नम याद में अश्रु बहाती है,


राह तकते हैं बच्चे जिसकी, "पापा जल्दी आएंगे" चर्चा करते रहते हैं,

 ना मालूम कब वो तिरंगे में लिपट कर आएगा, 

कौन देगा बापु को कंधा, बापु ही कंधा भला कैसे उसे दे पाएगा,


सूनी मांग देख-देख कर तड़पा करती उम्र भर वो सैनिक की जान है,

 मां की आंखें खो देती नूर रो-रोकर,

 बापु की भी टूट जाती कमर है, कौन रखे बच्चों के सिर पर हाथ, 

आ के सपने में सारे फ़र्ज़ निभा जाता वो सैनिक जवान है।



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