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Arun Gode

Romance

4  

Arun Gode

Romance

सावन

सावन

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4

 सावन

ऋतुओं में वर्षा ऋतु देती जीवन को संजीवनी,

धरती की हरियाली लगती मन को मनभावनी।

अरुणोदय में खिलते सुगंधित सुमन हर ओर,

सावन का नैसर्गिक सौंदर्य करता मन को चितचोर।


हल्की-हल्की वर्षा की शीतल फुहारें,

धरती की खुशगवार फिज़ाएं छू लें चारों दिशाएं।

बनाती मुझे हरदम उत्सुक सैलानी,

रुक जाती साँसें इन फिज़ाओं में बारंबार।


धरती का अनुपम, लुभावना रूप,

हरियाली शृंगार और रंगी -बेरंगी सुमन।

उसे मोहित करे अरुणोदय का भानु,

चमकीली पीले रंग की चादर आँखों दे सुकून।


शृंगार करके महिलाएं मनाएं सावन का त्योहार,

उनका हरा परिधान और उसपर सोने का हार।

मानो धरा से करने निकली स्पर्धा वो नारीयां,

ऐसे अदभूत नजारे देखे मेरे आंखे बार -बार।


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