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Mahendra Kumar Pradhan

Abstract

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Mahendra Kumar Pradhan

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साथ साथ रहना

साथ साथ रहना

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आकार प्रकार और वर्णभेद का

कोई असर नहीं हमें

यहां तो हमेशा प्रेम का कहर है।


भाव, विश्वास और भाईचारे का

बहुत कदर है हमें

यह तो अपने स्वजनों का शहर है।


बांध दो या मुक्त करदो बंधन से

कोई फर्क नहीं पड़ता हमें

हम साथ कभी छोड़ते नहीं हैं।


लाल हो श्वेत भगवा हो या हरा

नहीं कभी विद्वेष या भेदभाव

हम कभी झगड़ते नहीं हैं।


रक्तगत संपर्क नहीं, वंश का मेल नहीं

एकता के मंत्र, भावों से भरे नाते

हमको दिल से बहुत भाते हैं।


छल, कपट, बैर, ईर्ष्या, असूया नहीं

यहां चैन सुकून से साथ साथ रहना

कसम से बहुत रास आते हैं।


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