STORYMIRROR

सामान्य-असामान्य

सामान्य-असामान्य

1 min
267


हाँ, औरत ही समझो मुझे, यही आयाम तो अनोखा है,

मैं सुलभा, सुचेतना, प्रकृति मेरा अंदाज़ भी तो नोखा है!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama