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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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रूप-रंग

रूप-रंग

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खुशियों का उदासी पर पहरा है। 

अब जाकर सफेदी पर रंग ठहरा है।


संभाले नहीं संभला जो 

आज बदला है।

 जिंदगी का रूप-रंग निखरा है।


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