ऱाह
ऱाह
वक़्त लग़ता हैं हालात बदलने में
और वक़्त नहीं लग़ता बुऱी हालात बनाने में
दोनों हमारे उपर निर्भय है।
हमे क्या चुनना हैं ?
और क्या सुनना हैं ?
इसका चयन हमें ख़ुद करना हैं ।
जिंदगी नाम के इस महासागर में
हमें ख़ुद के दम पर तैरना है।
हर मुश्क़िल को हल करना हैं
अपनी ऱाह की ओर सिर्फ़ और सिर्फ़
आगे बढ़ना है।
