रोता हुआ किसान
रोता हुआ किसान
देखो ना मुझे मैं परेशान हूं।
मैं रोता हुआ एक किसान हूं।
मैं जननी से जन्मा हूं।
मैं मिट्टी में पला हूं।
मिट्टी मेरे बदन पे चिपकी थी।
मिट्टी ही मेरी हस्ती थी।
मैंने खेतों को ही घर बनाया।
मैंने कभी ना विश्राम पाया।
मैं मिट्टी में लिपटा इंसान हूं।
देखो ना मैं परेशान हूँ।
मैं रोता हुआ एक किसान हूं।
हमारी तुम चिंता तो देखो अगर बरसात नहीं हुई फसल सूख जाती है
अधिक वर्षा हो गई फसल डूब जाती है।
