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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Romance

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Romance

रंज ओ गम नहीं होता प्यार में

रंज ओ गम नहीं होता प्यार में

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मुझे याद आते हैं वो पल,

जो गुजारे थे तेरे संग कल,

बहक उठते हैं हमारे कदम,

मचल उठती हैं सांसें सनम।

तेरी यादों से मिलती है बेबसी,

दिल टूट जाता मिलती है बेरुखी।

पागल कर जाती हैं यादें,

दिल में रुक जाती हैं सांसे।

जिस्म करवटें बदलता है,

सांसें दम तोड़ती लगता है।

बार बार यादों से पूंछता है दिल,

देख तेरे बगैर मेरा बेहाल है दिल।

नहीं होती यादों से कोई शिकायत,

जब नहीं है प्यार हकीकत इनायत।

रंज ए गम नहीं होता प्यार में,

जिंदगी भूलकर कभी तकरार में।

मेरा जीना क्या जीना है,

यादों के सायें में जीना है।

पत्थर की मूरत बन जाते हैं लोग,

प्यार में तन्हा जब छोड़ जाते हैं लोग।



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