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Aditya Anand

Fantasy

4  

Aditya Anand

Fantasy

रंगीन

रंगीन

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है आफताब सामने रंगीन ही

है जज्बात सिमटे रंगीन ही

रंगीन है ये समां भी 

रंग में लीन है दुआ भी 

गर रम गए है यहाँ 

तो समझो हो गए रंगीन 

गर छूट गए कहीं 

तो लिपट जाना रंगीन 

हो रही बातें रंग-बिरंगी हर तरफ 

चल रही साँसे, बिना तोड़े जर्फ़

उम्मीद है 

तू भी रंगेगा

गुल से गुलिस्तां तक।


लेकिन

रंग तो हजार होंगे 

रंग हर ओर होंगे 

रंगीन होना लाजिमी होगा।

हो सके तो 

एक रंग 

मुट्ठियों में भरकर,

उड़ेल लेना खुद पे। 

ताकि रंग लगे 

तो रंग जाना 

न रंग बदलना

न रंग दिखाना।


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