STORYMIRROR

Pushp Lata Sharma

Abstract

3  

Pushp Lata Sharma

Abstract

रंग अबीर गुलाल

रंग अबीर गुलाल

1 min
409

पकड़ पकड़ कर, जकड़ जकड़ कर

लगाती है देखो रंग, होरी हुरियारों की 


करती है वो धमाल, लाल पीले रंग डाल,

पिचकारी लेके धार, छोरी पनिहारों की 


ढोल लिए ताशे संग भंग चढ़ी तरंग 

झूमती लगे है मस्त, टोली रंगदारों की 


मच रही हुड़दंगमन में लिए उमंग,

आया है त्यौहार होली, ऋतु है बहारों की।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract