रक्तदान सब दानों से उपर
रक्तदान सब दानों से उपर
दूत खुदा वो भर दे प्राण,
है सर्वदा वो मानव महान,
सब दानों में सबसे उपर,
सर्वदानी वो करे जो रक्तदान।
जमाना ठीक ही तो कहता है,
हर शख्स में खुदा रहता है,
शख्श एक दूजे के काम आएं,
सबके रगों में एक रक्त बहता है।
क्या पहचाना किसी ने
वो कौन सा रक्त है,
जो बहता सबके रगों
में हर वक्त है।
वो रक्त है दया का,
वो रक्त है अनुराग का,
वो रक्त है हृदय भाव का,
वो रक्त है लगाव का।
रक्त के भूखे मगर,
रक्त पीने लगे हैं,
रक्त बहाकर यहाँ
दानव जीने लगे हैं।
वो रक्त क्या जिसका
लक्ष्य जिंदगी न हो,
वो रक्त क्या जिससे
जीवन में किसी के रोशनी न हो।
शुद्ध पना ईमान कीजिए,
कर्म इतने महान कीजिए,
पैसों से जिंदगी नहीं मिलती,
करना है तो रक्तदान कीजिए।
